post:


Showing posts with label जिंदगी. Show all posts
Showing posts with label जिंदगी. Show all posts

Thursday, September 28, 2017

Maihar Yatra मैहर यात्रा

मैहर यात्रा 28 September 2017
हिन्दु धरम में सबसे बड़ी परेशानी है की मेहरारू के साथ धरम करम करना पड़ता है, इस साल कही पत्नी जी को ले कर कही निकले नहीं थे समाधी में, मने मेडिटेशन में क्यों की पत्नी जी के साथ मेडिटेशन करने से शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से हम स्वस्थ्य रह सकते हैं। मेडिटेशन तनाव और चिंता जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान में भी लाभदायक है। तो सोचा था इस साल कुछ तूफानी करते है, चुकी पत्नी जी संघी मिजाज की है तो धार्मिक आस्था की बवासीर हर समय चपका रहता है आउर हम रहे सम्भोग से समाधी वाले, यही मामला नहीं मिलता है हर दिन किसी न किसी बात पर पत्नी जी से पंगा हो जाता है, लेकिन हिन्दू धरम में दहेज़ एक बुरी प्रथा है जो पैसे के लालच में मा बाप अपने बेटे के बेच देते है रोज सुनना पड़ता है .. एकदम्मे चूतिया हो का बे ???????? 

Read more

Monday, February 15, 2016

वैलेंटाइन रे वैलेंटाइन

अभी ऑफिस में वर्क लोड कुछ ज्यादा ही है, तो कुछ कम ही लिख पाते है... लेकिन इस साल कुछ खास सोचा था की इस साल हम संत वैलेंटाइन जरुर बनेगे.. इस लिए बनारस गया था पत्नी जी के साथ कुछ रोमांटिक फोटो खीचने के लिए, वैसे इस बार का थीम सोचा था " गोरी तेरा गाव बड़ा प्यारा " घाट किनारे बेटे की सायकिल ले कर उस पत्नी जी को बैठा कर कुछ रोमांटिक अंदाज में फोटो खिचाने का .. लेकिन कहते है न किस्मत थी .गांडू.. तो हम आ गए काठमांडू.. जाने दीजिये साहेब अब ज़िन्दगी में इतने मुक़दमे हैं .. एक मुकदमा मुहब्बत का भी सही ।

Read more

Tuesday, August 18, 2015

नागपंचमी (पचैंईया) और बनारस

नागपंचमी का त्योहार तो वैसे पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन बनारस में इसका कुछ ज्यादा महत्व दिखता है। यह हिंदुओं का साल का पहला त्योहार होता है। नगर और जिले के गांवों में कहीं कुश्ती दंगल तो कहीं बीन की धुन पर जादू का खेल होता है। प्रायः हर घरों में लोग सुबह नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि घर के दरवाजे पर लावा और दूध इसलिये रखा जाता है कि नाग देवता इसे ग्रहण करेंगे। कुश्ती-दंगल के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जलेबी की दुकानें भी सजती हैं लोग इसका खूब लुत्फ उठाते हैं। लेकिन बनारस में कहावत है "सात वार नौ त्यौहार", यानी सप्ताह में दिन तो सात होते हैं पर बनारस  में उनमें नौ त्यौहार पड़ते हैं। मौज-मजे के लिए सदा से प्रसिद्ध रहा है और अपनी इस प्रवृत्ति को चरितार्थ करने के लिएही बनारसियों ने अनेक त्यौहारों की कल्पनाएँ कीं। और लोग बहुत सी छुट्टियाँ मनाने के लिए बनारस वालों को नाकारा न कहें, इसलिए उन्होंने इनमें से अधिकतर त्यौहारों को भिन्न-भिन्न देवताओं के साथ जोड़ दिया। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बनारसियों के जीवन में परिवर्तन होता चला जा रहा है फिर भी जिस प्रेम से छुट्टियाँ और त्यौहार बनारस में मनाए जाते हैं - वैसे भारत में और किसी दूसरी जगह नहीं। बनारसियों के त्यौहार का रंग भी कभी मनहूस नहीं होता। अपने थोड़े से वित्त में ही लोग हँस-खेल कर त्यौहार मना लेते हैं। बनारस के त्यौहारों के इतिहास पर अभी अधिक प्रकाश नहीं पड़ा है, पर इसमें संदेह नहीं कि इनमें कुछ मेले बहुत प्राचीन होंगे। बनारस की दीवाली का तो उल्लेख जातकों में आया है और जातकों में वर्णित हस्तिपूजन का भी बाद में शायद विजया दशमी का रुप हो गया है। इन मेलों तमाशों का संबंध हम यक्षपूजा, वृक्षपूजा, देवीपूजा, कूप और नदी-पूजा तथा पौराणिक देव-देवताओं की पूजा से पाते हैं। बनारस के मेलों तमाशों में भी एक विकास क्रम है जिससे यह पता चल जाता है कि कौन-कौन से मेले प्राचीन है और कौन-कौन से मेले बनारस की भिन्न-भिन्न काल की धार्मिक प्रवृत्तियों के विकास के साथ-साथ बढ़ते गए।
Read more

Monday, August 17, 2015

बनारस की गालियाँ

वो बनारस का बचपन, खास मुझे याद आता है.. वो अस्सी का होली सम्मलेन, शायद मै जब बाहर किसी से अपने बनारस की बात करता हु, अगर वो पूछ ले हो गया आप के इज्जत का कबाड़ा.. लेकिन सही ये है की ये ही बनारस का रस है.. लोग गाली न दे तो शहर का अपमान है... “भोसड़ी के” तो बनारस का ताज है, अगर आप को न मिले तो बनारस नीरस लगेगा
Read more

Saturday, June 27, 2015

ऐ माँ फिर से ..

ऐ माँ फिर से मुझे मेरा बस्ता देदे की दुनिया के दिये सबक मुश्किल बहुत है

पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी,
डगमगाना भी ज़रूरी है संभलने के लिए।

उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा ,
वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

Read more

Monday, March 2, 2015

मन की बात

बात उन दिनों की है जब मै शायद क्लास ७-८ में पड़ता था.. पापा बड़ी बुवा के यहाँ लखनऊ गए थे , घर में हम संजू टूसी और अम्मा... पापा के लखनऊ जाने के ४-५ दिन बाद माता जी ने पिता श्री का हाल खबर 
लेने की लिए मुझे २० रूपया दिया , इन दिनों संचार के साधन बहुत महगे थे , अपने चौराहे पर तो कोई फोन बूथ भी नहीं था , उन दिनों घर में लैंड लाइन फोन एक स्टेटस सिम्बल होता था , अपने घर में भी फोन नहीं था , तो मै २० रूपए ले कर नाटी इमली चौराहे पर काशी के दुकान पर गया , काशी को २० का नोट दे कर बुवा के घर का नंबर लगाने को कहा , फोन की घंटी गयी , उधर से किसी ने उठा , मैंने कहा , मै काटन मिल से राजू बोल रहा हु , मेरे पापा से बात करा दीजिये, पापा लाइन पर आये ..” पापा हम राजू बोलत हई..., कब घरे अइबा , अम्मा पूछत हइन ... उधर से पापा.... “ हा बोलो बेटा , कैसे हो तुम, घर में सब लोग कैसे है, मै
Read more

Wednesday, August 7, 2013

तारीख बदलती है

रोज तारीख बदलती. है,
रोज. दिन. बदलते. हैं....
रोज. अपनी. उमर. भी बदलती. है.....
रोज. समय. भी बदलता. है...
 
हमारे नजरिये. भी. वक्त. के साथ. बदलते. हैं.....
बस एक. ही. चीज. है. जो नहीं. बदलती...
और वो हैं "हम खुद".....और बस इसी. वजह से हमें लगता है. कि. अब "जमाना" बदल गया. है........


किसी शायर ने खूब कहा है,,
रहने दे आसमा. ज़मीन कि तलाश. ना कर,,
सबकुछ। यही। है, कही और तलाश ना कर.,


हर आरज़ू पूरी हो, तो जीने का। क्या। मज़ा,,,
जीने के लिए बस। एक खूबसूरत वजह। कि तलाश कर,,,
 
ना तुम दूर जाना ना हम दूर जायेंगे,,
अपने अपने हिस्से कि। "दोस्ती" निभाएंगे,,,

बहुत अच्छा लगेगा ज़िन्दगी का ये सफ़र,,,
आप वहा से याद करना, हम यहाँ से मुस्कुराएंगे,,,
 
क्या भरोसा है. जिंदगी का,
इंसान. बुलबुला. है पानी का,

जी रहे है कपडे बदल बदल कर,,
एक दिन एक "कपडे" में ले जायेंगे कंधे बदल बदल कर,,।।
Read more

Monday, July 8, 2013

सादी कि बारहवी सालगिरह

अच्छा सुनो..

तुम ही वो थी जो मेरे जैसे निट्ठले के साथ १३ साल निकाल दिया , समय कैसे निकाल गया कुछ पता ही नहीं चला , हमने जितनी लड़ाइया एक दुसरे के साथ लड़ी है उतनी तो इतिहास में भी नहीं है.. फिर भी जीवन के कुछ अनमोल पल हम दोनों ने साथ ही देखे है ... अभी याद आया गया की समय के प्रवाह के साथ हमने भी अपने दांपत्य के १३ पड़ाव आज पार कर लिए. १३ वर्ष पूर्व आज ही के दिन यानी ८ July २००० को हमने एक दूसरे का हाथ थाम कर सप्रेम साथ निभाने का जो संकल्प लिया था उसे हम दोनों ने मिलकर पूरा करने की भरपूर कोशिश की है और हमें इसमें भरपूर कामयाबी भी मिली है. मुझे तो मिली है.. तुम्हारा पता नहीं.. यह सब कुछ ईश्वर की कृपा और माता पिता सहित बड़ों के आशीर्वाद का फल है. हमें आशीर्वाद दीजिए कि ईश्वर की कृपा हम पर बनी रहे और हमारा सहजीवन यों ही हँसी खुशी सफलतापूर्वक आगे बढ़ता रहे...


Read more

Tuesday, June 11, 2013

बिना निष्कर्ष पर

आज चार दिन हो गया काठमांडू, दिल्ली, देहरादून से ऋषिकेश भांजे की शादी में आये है रात में पार्टी भी जबरजस्त तो आज सोच रहे है कुछ तीर्थ पुण्य भी कर लिया जाये... आगे तो मसूरी का प्रोग्राम है इस लिए बारात बिदा के बाद ऋषिकेश घुमने का प्रोग्राम किया है, जिसे पूरे एक दिन में घूमा जा सकता है। वैसे तो यहां काफी दर्शनीय स्‍थल देखने लायक है। जैसे- हरिद्वार का मंसादेवी-माया देवी का मंदिर, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय, चंडी देवी का मंदिर, सप्तऋषि आश्रम, दक्ष प्रजापति का मंदिर, भीमगोड़ा तालाब, भारत माता मंदिर आदि लेकिन देखते है कहा कहा घूम पाते है... निकल पड़े होटल से नास्ता कर घुमने ऋषिकेश होटल से निकले ही की रास्ते में सेव बिक रहा था.. शादी में अंड बंद ज्यादा ही हो गया था... तो पत्नी जी ने सलाह दी बेटे के सेव खिलने की , अब ढोए कौन तो २ पिस ले लिया और दोनों हाथो में पकड़ा दिया बेटे को.. चल पड़े आगे.. एक मस्करी सूझी.. 

"बेटा एक एप्पल मुझे दे दो"

इतना सुनते ही बेटे ने एक एप्पल को दांतो से कुतर लिया.

मै कुछ बोल पता उसके पहले ही उसने अपने दूसरे एप्पल को भी दांतों से कुतर लिया

अपने छोटे से बेटे की इस हरकत को देखकर मै ठगा सा रह गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई थी...

तभी उसके बेटे ने अपने नन्हे हाथ आगे की ओर बढाते हुए पापा को कहा....

"पापा ये लो.. ये वाला ज्यादा मीठा है.

शायद हम कभी कभी पूरी बात जाने बिना निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं.... 

खैर जीवन भी कुछ ऐसा ही है ..

पैदल घूमते घूमते


वहा एक ऑटो वाला मिल गया पूछा क्या क्या है यहाँ देखने लायक.. बस टेप रिकार्डर की तरह
 
लक्ष्मण झूला
गंगा नदी के एक किनार को दूसर किनार से जोड़ता यह झूला नगर की विशिष्ट की पहचान है। इसे १९३९ में बनवाया गया था। कहा जाता है कि गंगा नदी को पार करने के लिए लक्ष्मण ने इस स्थान पर जूट का झूला बनवाया था। झूले के बीच में पहुंचने पर वह हिलता हुआ प्रतीत होता है। ४५०  फीट लंबे इस झूले के समीप ही लक्ष्मण और रघुनाथ मंदिर हैं। झूले पर खड़े होकर आसपास के खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है। लक्ष्मण झूला के समान राम झूला भी नजदीक ही स्थित है। यह झूला शिवानंद और स्वर्ग आश्रम के बीच बना है। इसलिए इसे शिवानंद झूला के नाम से भी जाना जाता है। ऋषिकेश मैं गंगाजी के किनारे की रेट बड़ी ही नर्म और मुलायम है, इस पर बैठने से यह माँ की गोद जैसी स्नेहमयी और ममतापूर्ण लगती है, यहाँ बैठकर दर्शन करने मात्र से ह्रदय मैं असीम शांति और रामत्व का उदय होने लगता है।..
 
त्रिवेणी घाट
ऋषिकेश में स्नान करने का यह प्रमुख घाट है जहां प्रात: काल में अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं। कहा जाता है कि इस स्थान पर हिन्दु धर्म की तीन प्रमुख नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इसी स्थान से गंगा नदी दायीं ओर मुड़ जाती है। शाम को होने वाली यहां की आरती का नजारा बेहद आकर्षक होता है।
 
स्वर्ग आश्रम
स्वामी विशुद्धानन्द द्वारा स्थापित यह आश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन आश्रम है। स्वामी जी को काली कमली वाले नाम से भी जाना जाता था। इस स्थान पर बहुत से सुन्दर मंदिर बने हुए हैं। यहां खाने पीने के अनेक रस्तरां हैं जहां सिर्फ शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है। आश्रम की आसपास हस्तशिल्प के सामान की बहुत सी दुकानें हैं।
 
नीलकंठ महादेव मंदिर
लगभग ५५००  फीट की ऊंचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। विषपान के बाद विष के प्रभाव के से उनका गला नीला पड़ गया था और उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहां भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्थान करते हैं।
 
भारत मंदिर
यह ऋषिकेश का सबसे प्राचीन मंदिर है जिसे १२  शताब्दी में आदि गुरू शंकराचार्य ने बनवाया था। भगवान राम के छोटे भाई भरत को समर्पित यह मंदिर त्रिवेणी घाट के निकट ओल्ड टाउन में स्थित है। मंदिर का मूल रूप १३९८ में तैमूर आक्रमण के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हालांकि मंदिर की बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों को उस हमले के बाद आज तक संरक्षित रखा गया है। मंदिर के अंदरूनी गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा एकल शालीग्राम पत्थर पर उकेरी गई है। आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा रखा गया श्रीयंत्र भी यहां देखा जा सकता है।
 
कैलाश निकेतन मंदिर
लक्ष्मण झूले को पार करते ही कैलाश निकेतन मंदिर है। १२ खंड़ों में बना यह विशाल मंदिर ऋषिकेश के अन्य मंदिरों से भिन्न है। इस मंदिर में सभी देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
 
वशिष्ठ गुफा
ऋषिकेश से २२  किमी. की दूरी पर ३०००  साल पुरानी वशिष्ठ गुफा बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर स्थित है। इस स्थान पर बहुत से साधुओं विश्राम और ध्यान लगाए देखे जा सकते हैं। कहा जाता है यह स्थान भगवान राम और बहुत से राजाओं के पुरोहित वशिष्ठ का निवास स्थल था। वशिष्ठ गुफा में साधुओं को ध्यानमग्न मुद्रा में देखा जा सकता है। गुफा के भीतर एक शिवलिंग भी स्थापित है।
 
गीता भवन
राम झूला पार करते ही गीता भवन है जिसे १९५० ई. में श्रीजयदयाल गोयन्काजी ने बनवाया गया था। यह अपनी दर्शनीय दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामायण और महाभारत के चित्रों से सजी दीवारें इस स्थान को आकर्षण बनाती हैं। यहां एक आयुर्वेदिक डिस्पेन्सरी और गीताप्रेस गोरखपुर की एक शाखा भी है। प्रवचन और कीर्तन मंदिर की नियमित क्रियाएं हैं। शाम को यहां भक्ति संगीत की आनंद लिया जा सकता है। तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए यहां सैकड़ों कमरे हैं।
 
लेकिन काम जी जगह उनसे नहीं बताई.. जो खास है ऋषि केश में
 


केंद्र सरकार ने भले ही गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया हो मगर इसके तटों पर विदेशी आस्था को तार-तार करने में लगे हैं. ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला से करीब एक किमी आगे विदेशी सैलानियों ने गोवा की तर्ज पर गंगा किनारे गोवा बीच बना रखा है. यह तीर्थनगरी में पिछले कई साल से प्रचलित है. ‘गोवा बीच’ पर विदेशी सैलानी अर्धनग्न और निर्वस्त्र होकर गंगा किनारे रेत में धूप स्नान (सन बाथ) करते हैं. जिस कार्य को भारत की संस्कृति में परदे में किया जाता है उसे विदेशी सैलानी खुलेआम करते हैं. दिलचस्प यह कि इन विदेशी सैलानियों को अर्धनग्न और निर्वस्त्र कपड़ों में देखने के लिए भारी संख्या में स्कूली छात्र और कुछ मनचले युवक यहां पहुंचे रहते हैं. भले ही विदेशियों की संस्कृति उन्हें अपने यहां यह सब करने की इजाजत देती हो लेकिन भारत में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. वह भी खासकर धार्मिक नगरी के किनारे.
पर पत्नी जी ने कलयुग के गोवा जाने की इजाजत नहीं दी तो मन उदास हो गया फिर त्रिवेणी घाट पर जा कर बैठ गए... क्या करते हम तो मजाक ही कर रहे थे चलो एक तीर्थ यात्रा भी कर ले, लेकिन श्रीमती जी ने तो दिल पर ले लिया, बस राम झुला, लक्ष्मण झूला, अब क्या झूलते झूले पर.. बस फार्मेल्टी... तो वहा का प्रसिद्द चोटी वाला भोजनालय, सपरिवार भोजन जचाया.... चल पड़े वापस देहरादून....   
Read more

Friday, May 17, 2013

वादा है

अगर सिगरेट और शराब पीकर आप सोचते हैँ गम मिट जायेगा तो कसम सिगरेट से निकलने वाले धुँये के आखिरी छल्ले से मरने वाले मच्छर की.. कल आप भी अपनी प्रोफाइल फोटो मेरे जैसी ही लगालेना.. बड़ी कसमे और वादे के साथ नया जीवन ले कर आया हु कहा तो है अब कभी नहीं... पहले भी तो कई बार कहा था .. लेकिन नया सूरज.. नयी सोच.. लेकिन शायद ये मेरा चेहरा मुझे अपने वादे पर कायम रहने की ताकत देगा....... अपने देखने की सारी जगहों पर तुम्हारी ही तस्बीर बना डाली थी.. अब सब मिटाकर सिर्फ अपनी ये तस्बीर.. ताकि अब इस जनम में उस रात की मेरे कुकर्मो को याद दिलाता रहे.. एक बार फिर क्षमा .. वादा है पूरी ताकत झोक दुगा.. तुम्हारे इस वचन को निभाने के लिए..


कबीरा जब हम पैदा हुए जग हँसे हम रोये !
ऐसी करनी कर चलो हम हँसें जग रोये !



Read more

Tuesday, August 14, 2012

अलविदा...पापा की उन यादो के साथ

१० अगस्त २०१२, सुबह ऑफिस में, काठमांडू में टैक्सी और सार्वजानिक यातायात की हड़ताल.. तो पैदल ही ऑफिस में.. महीने का १२ दिन थोडा ज्यादा ही प्रेसर होता है काम का, उपर से लोड शेडिंग , तो थोड़ी बत्ती की भी परेशानी, कागज फिअल दिया था , स्टाफ लोगो की सेलरी फाइनल करनी थी, तो लग गया था काम में... काम का बोझ था तो खाना खाना भी भूल गया था ... बस सिगरेट चाय.. दोपहर का ३ बजा ही था की श्रीमती जी Kshama का ..फोन बजा.. पता नहीं क्यों मेरी आदत है उनका फोन दिन में.. क्या बात .. उनका फोन काट के मैंने इधर से मिलाया.. क्या बात.. श्रीमती जी ने कहा संजू भैया का फोन आया था .. मैंने कहा नहीं.. तुम तुरंत घर आ जाओ, मै काटन मिल जा रही हु.. अरे क्या हुवा बताओ तो.. बस उधर से रोना शुरू... तुम कैसे भी तुरंत घर पहुचो.. अभी कोई फ्लाइट मिले तो पकड़ लो.. अरे क्षमा कुछ बोलो तो..

Read more