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Sunday, May 28, 2017

Congress Social media : कांग्रेस सोशल मीडिया सम्मलेन

हाला की कभी राजनीती से झुकाव नहीं रहा है क्यों की माँ पिता जी को राजनीती पसंद नहीं, बचपन से यही सिखाया गया की सबसे गन्दी राजनीती ही होती है..

यु तो लिखने पड़ने का सुख नेपाल में ही ले पाया क्यों की जब तक भारत में रहे नौकरी के लिए ही संघर्ष करते रहे, बचपन से थे लंठ बनारसी तो हर जगह वही अंदाज.. २००४ से सोसल साइड के आने के बाद लगा की बनारस के लोग कुछ भी नहीं जानते क्यों की वो सिफ शिवत्व में ही रहते है .

गूगल बाबा के अनुसार “नागरिक स्तर पर या व्यक्तिगत स्तर पर कोई विशेष प्रकार का सिद्धान्त एवं व्यवहार राजनीति (पॉलिटिक्स) कहलाती है। अधिक संकीर्ण रूप से कहें तो शासन में पद प्राप्त करना तथा सरकारी पद का उपयोग करना राजनीति है। राजनीति में बहुत से रास्ते अपनाये जाते हैं जैसे- राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ाना, कानून बनाना, विरोधियों के विरुद्ध युद्ध आदि शक्तियों का प्रयोग करना। राजनीति बहुत से स्तरों पर हो सकती है- गाँव की परम्परागत राजनीति से लेकर, स्थानीय सरकार, सम्प्रभुत्वपूर्ण राज्य या अन्तराष्ट्रीय स्तर पर। “

इस लिए अपन का पाला पड़ा नहीं, जो भी है, इन्टरनेट न आने से पहले हम सिर्फ १ किताब और -2 शिक्षक के ज्ञान के आधार पर ही हमारा ज्ञान सिमित था, लेकिन अब एक ही बात के हजारो ब्याखान है, २००८  में फेसबुक पर आया था. उस समय फेसबुक का माहौल बड़ा ही रोमांटिक हुआ करता था.कहीं से भी नहीं लगता था की देश में कोई समस्या है..या सरकार कुछ गलत कर रही है..मने सरकार तो सरकार विपक्ष भी कहाँ था,ये समझ में नहीं आता था..चारों ओर अमन-चैन का वातावरण था.

न प्रधानमंत्री का पता चलता था की वो सो रहें हैं कि जगें हैं,न ही राष्ट्रपति का, की वो बोल रहे है या चुप हैं...न ही किसान खतरे में थे,न जवान..न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कम हुई थी, न ही प्रेस की आज़ादी. इस आभासी दुनिया के बाहर जल,थल,नभ में भले ही बेहिसाब घोटालें हो रहें हों..लेकिन फेसबुक का माहौल बड़ा ही अलंकारिक और काव्यपूर्ण था.. लेकिन काग्रेस पार्टी ने घोटालो की बखिया खोलने लगी तो फेसबुक भी एक समाचार का माध्यम हो गया. 2g , 3g , कोल घोटाला, लेकिन उन सबसे आम जनता कपर क्या फर्क पड़ा वो समझ में नहीं आया , हाला की १९८० से अब तक बहुत ही बदलाव मैंने देखे , वो भी क्या जमाना था जब वेस्पा या प्रिया स्कूटर होती थी, अब तो कितना बदल गया है समय.
इसी माहौल में आए दिन एक से बढ़कर एक साहित्यिक घटनाएं-दुर्घटनाएं होतीं..हम बालक नादान होने के कारण उन्हें छिप-छिप कर गौर से पढ़ते. और सोचते बाप रे ! ई तो फलनवा हैं..बड़का लेखक..अरे! हई कौन! कवि ढेकाने ..इनका कमेंट तो समझने के लिए लगता है फिर से स्कूल जाना पड़ेगा

अच्छा लगता था पड़ने में, किसी का भी निवेदन आये जुड़ जाते थे कब ५००० मित्र हो गए पता ही नहीं चला खैर राजनीती न हो तो लोगो का चिंतन ही मर जाये, मुझे तो राजनीती का असली स्वरुप २०१४ में दिखा जब भाजपा बम बिलाट आई... लेकिन मेरा पाला सोसल मिडिया पर शुरुवाती दौर में सिर्फ उत्तरपंथी लोगो से पड़ा जिनकी वो विचार धारा हम सुने ही नहीं थे, बनारस में यार आधा जीवन निकाल दिया, खैर २००९ से लोगो को फेसबुक पर देख रहा हु, अपन सिर्फ न्यूट्रल बन के बैठे रहते थे केवल एक मजे के लिए लिख देते थे कुछ लेकिन ऐसा की जो उत्तरपंथियों को पसंद न हो, २०११ में कुछ सिखने के हिसाब से एक बड़ी कंपनी ज्वाइन कर ली तब पता चला की सब ब्रांड और मार्केटिंग की टीम के साथ काम करने पर राजनीती का बतलब समझ में आने लगा, अगर ये इमानदारी का काम होता तो क्यों वो अपनी मार्केटिंग का काम करते, जो दीखता है वो बिकता है, आज कल इसमें भी बड़ा कैरियर है भाई, इसके कई खंड है जो मैंने अपने इस लेख में लिखा है, " यहाँ देखे

प्रिंट मीडिया(पेड न्यूज), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के कारनामें

उस समय काग्रेसी विचार धारा के लोग गूगल पर दीखते ही नहीं थे, सारा गूगल सिर्फ काग्रेसियो के कुकर्म के बारे में, भारत में लोग इन्टरनेट से परिचित हुवे २०१० में लेकिन लेकिन किसी तंत्र ने फेसबुक से ले कर गूगल तक सिर्फ काग्रेस की कमिया ही दिखाई, फोटोशोप के जनक भी नहीं सोचे होगे की उनका प्रयोग भारत में इतना पापुलर होगा .. अपन भी देखते कोई जवाब नहीं दीखता, मैंने मार्केटिंग की एक दो कैपेनिंग भी देखी तब समझ में आया की क्या है फंडा, मार्केटिंग का फंडा अपन का माल आछा .. सामने वाले का कच्छा... मुझे लगता है जिस किसी का ये इनोवेसन है, शानदार है कुछ सिखने का नया मौका मिलता है, आपन को तो पिता जी बता गए थे की भगवान ने 2 कान इस लिए दी है की एक कान से सुनो अच्छा लगे तो वकुम करो बेकार लगे तो दुसरे कान से निकल दो ... मै भी अपना मस्ती करता रहता था काग्रेस के पक्ष में बलैंस बनाने के हिसाब से पता नहीं कब दिल से काग्रेसी बन बैठा की पता ही नहीं चला २०१५ से लोग काग्रेस के समर्थन में आने लगे, लेकिन देर हो चुकी थी, वो लोग अच्छे लेखक तो थे लेकिन लोग उनकी बातो को इग्नोर ही करते थे क्यों की उने दिमाक में भर दिया गया था की काग्रेस कुछ नहीं कर सकती, नेहरु की पोस्ट गाँधी जी के बारे में इतना गन्दा हे राम क्यों की मेरे समय तक बनारसी की सोच इतनी एडवांस नही थे इसी बिच भाजपा के प्रताप के काउंटर में सभी राजनितिक पार्टिया अपना सोसल टीम तैयार कर चुकी थी. तब दक्षिणपंथ का भी मतलब समझ में आया, बस इस मार्केटिंग में इन्हों ने ट्रोल की एक सिट बना दी, वही इनसे गलती हो गयी.  इ फंडा लोगो में झगडा करवा के माल बेचने का , अरे वाह राजा ये भी अच्छा सब्जेक्ट था तो मजा लेते थे, फेसबुक पर लिखो, निकल लो, जब फुर्सत मिले आराम से पड़े

सबसे ज्यादा मुझे संघ के पक्ष में लिखने वाले बड़े भाई अजित सिंह पहलवान “ जी लिखते है, खूंखार सोच है, उनका टारगेट हमेशा काग्रेस की तरफ रहता है, आप शायद न जानते हो लेकिन पूर्वांचल में वायरल पोस्टो में आप का बड़ा योगदान है उनकी, एक दम सोसल मिडिया पर बात अपने पक्ष की हो तो ठीक नहीं तो साले को ट्रोल करो, न माने तो ब्लोक मारो, वाह भाई... आईडिया तो ठीक ही है .

तो मै भी ट्रोल करता अपनी पोस्ट पर, न माने तो ब्लाक २२ हजार लोगो को ब्लोक किया है यार,  वैसे तो लफंतुसो का गम नहीं लेकिन मै भाई Suresh Chiplunkar जी उज्जैन से, जीतेन्द्र प्रताप सिंग जी अहमदाबाद से, सबसे दुःख होता है अपने प्रिय ललित शर्मा जी, पता नहीं क्यों नहीं भूल पाता उनको, बस अपन तो आज भी उनको फालो करते है, आज भी शायद काग्रेस के सोसल मिडिया के लोग इनको न जानते हो लेकिन ये लोग उस दौर के है जब सोसल मिडिया शुरू हुवा था 

लेकिन सोसल मिडिया पर पठन पठान का काम चलता रहा, संघ के लेखक के मुकाबले में काग्रेस की तरफ से भाई ओमकार सिंह ढिल्लन और विशाल कुंद्रा ही आये है, ये लोग सीधे संघी सोच के लोगो को फायर करना शुरू किये तब मुझे अच्छा लगा चलो करवा बन तो रहा है न. काग्रेस नहीं सोच पाई ये अपन से समझ में अभी तक नहीं आया, क्यों की काग्रेस दूरदर्शी थी, वो कुछ भी सोचती थे लम्बे रेस के हिसाब से दूरदर्शन और मिडिया के आने से पहले सिर्फ देश में रेडिओ और पत्रिका का ही दौर था लेकिन पिता जी कभी सुनने ही नहीं दिए क्यों की राजनीती गन्दी होती है, आज टीवी प्रिंट और रेडिओ है तो लोगो की कितनी जागरूकता बढेगी, क्यों की भारत के नागरिको के पास आप्सन है, यहाँ हर चीज का इलाज है, हमारे ज़माने में तो माइक्रो सॉफ्ट का विंडो भी क्रैक कर देते थे तो काग्रेस के समर्थक बढ़ने लगे, लोग सामने आने लगे, लेकिन अपन तो दूरदर्शी थे, घर में पूजा करने से फुर्सत मिले तब न राम मंदिर जाये, जात पात से दूर सिर्फ अपनी नौकरी में, वही अपनी दुनिया है भाई, पहले नौकरी फिर खाली हुवे तो काग्रेस, अभी तो आप काग्रेस की गाथा सुनने बैठे तो, आप गिर न जाये, खैर मैंने भी जो सुना है काग्रेस के बारे में इसी मिडिया से ही सुन है, क्यों की ये सब तो कोर्स की किताब में थी नहीं, और बाहर देखने दिया गया नहीं,

अभी काग्रेस के लिए अच्छे विचारक हो चुके है जो सोसल मिडिया पर भिड़े है जब आप का मन करे आप इन लोगो को पड़ सकते है, chanchal BHU , रनिश कबीर, Ramendra Jenwar , जाहिद भाई, संघियों से डायरेक्ट मोर्चा लेने में पडरौना के भाई देश दीपक मिश्र जी भी मशहूर है और भी लोग है, आप लोग अभी भाई ओमकार जी, अमरेंदु जी, Ratan Pandit जी Urmilesh Urmil ओम थानवी जी है,और ऐसे न कितने

लेकिन काग्रेस पार्टी में कोई धुरंधर सामने नहीं आया, सब राहुल गाँधी के ऊपर, काग्रेस की तरफ से सोसल मिडिया टीम दिखाई देने लगी, लेकिन वो लोग अपनी बातो को आप्टेक नहीं करा पाए, मतलब तो जनता को रीसेल नहीं कर पाए, क्यों की पहले मिडिया ने एक लम्बा डाटा बैंक बनाया है की कैसी चीज की डिमांड है उसके यूजर कितने है, अब उतना तो काग्रेस नहीं सोच पाई, क्यों की वो सैधांतिक पार्टी है, काग्रेस एक विचार धारा है, जो समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन बीजेपी के मार्केटिंग कंपनी को ये समझ में नहीं आया की भारत में लोगो को सम थिंग न्यू करने की आदत है, इसी प्रयास में भाई मनोज शर्मा जी का साथ मिला वो भी ब्लॉग पर लिखने लगे, गूगल में डाटा आना शुरू हुवा, तभी जनवरी में पता चला की काग्रेस की एक सोसल मिडिया सम्मलेन जी जानकारी मिले Challenges and Oppotunities of Cangress तो मैंने सोचा की एक बार मिलते है पूरी कहानी इस लेख पर मैंने लिखा है, मै पहुच गया दिल्ही बस से ही १८ मई २०१७ को दिल्ही १९ को पहुच गया, इस सफ़र में ये समझ में आया की जो काम हुवा है, शायद वो अभी भी कम है, तो लोगो का उफान मरने लगा है, भाई प्रमोद सिंह के मुताबिक मै होटल नेहा इन पहाड़ गंज में रुका , दिल्ह की गर्मी, तभी भाई मनोज जी का फोन आ गया करोल बाग़ आ जाओ, मै टैक्सी भेज देता हु, लेकिन मै २००२ की यादो को ताजा करते पहाड़ गंज में छोले कुलचे दबा कर फिर ऑटो पकड़ पहुच गया भाई Shruti Pande एसपी पांडे Palmist & spritual जी के आफिस में जो की इस कार्यक्रम के आयोजक थे

Shruti Pande जी के आफिस में पंहुचा तो बाहर ही डाक्टर मनोज शर्मा जी मिल गए पहली बार आप से मुलाकात हुई, गले लगया अन्दर गए , सभी लोगो से परिचय हुवा इसके आगे भाई मनोज जी ने लिख ही दिया है, (समर्थको के सवाल,राजा दिग्गी के जबाब, और बाबा का संघियो पर वार Part -1 ) करोल बाग के अपने आफिस में श्री एस पी पांडेय जी अपने सहयोगियों के साथ मिडिया वालो को निमंत्रण देने में व्यस्त थे । हमको देखते ही खड़े हो कर गले मिल अभिवादन और स्वागत किया । कुछ ही देर में कांग्रेस की महानं विभूतिया वहां एकत्र होने लगी डाक्टर राज पुरोहित, जैन साहब के पास भी अच्छा मसाला था काग्रेस के लिए । बहस और तर्कों का मंथन मिक्सी में मसाले की तरह पीसा जाने लगा ।  उस तर्क और वितर्क में कांग्रेस की विचारधारा का चन्दन जैसे अपने खुशबू वह फैला रहा था। वहां पांडेय जी की सादगी और सम्मान देने का अनोखा गुण इसलिए भी ,एक बड़े उद्योगपति और इतना सहज ? ऐसे लोगो को ईश्वर से विरासत में मिलता हैं। फ़िलहाल ५ घंटे की ये गुफ्गु बड़ी रोमांचक रही..
 
अब दिल्ही पहुचे तो लोगो का फोन न आये, खैर मित्र लंगोटिया यार संजीव गुप्ता और सतीश भाई, एक और मित्र के साथ पहुच चुके थे, १० बज गया था लेकिन देश तो वैसा ही है जैसा 60 सालो से है जेब में पैसा है तो सब आसान है, खैर इतजाम हुवा हम तो पांडे जी के साथ रात का भोजन कर चुके थे, लेकिन दोस्ती भी तो कोई चीज है यार हमारे संजीव भाई संघी मिजाज के है, मजा आता है उनसे बात करने का दोनों लंगोटिया यार है भाई, कमरे में बैठे ही थे की गुजरात के भाई राजेश भरवाड़ जी मिल गए... परिचय हुवा, लेकिन हम लोग उस हालत में नहीं थे की ज्यादा बात तो सके, तो माफ़ी मागते बिदा किया, सुबह मिलते है, बैठकी में रात का दो बज गया
मित्रो को बिदा किया पकड़ लिए बिस्तर और अगले दिन ९ बजे सो के उठे, तैयार हो गए ११ बजे तक, सुचना मिली की हम कनाट प्लेस में मिलते है , हम भी निकल लिए भाई राजेश भरवाड के साथ, सरदार जगमोहन जी वही थे, लेकिन हम लोगो ने ४ चक्कर के मारे राजीव चौक में  नहीं मिले तभी सुचना मिली की कुछ लोग मावलंकर आडिटोरियम, रफी मार्ग, नई दिल्ली  पहुच चुके है तो हम भी अपना कैमरा ले पहुच गए, दिन के एक बज गए थे भूख भी भयंकर लगी थी, जल्दी में सुबह नास्ता भी नहीं किया था हाल के कैंटीन में पहले से मित्र लोग मौजूद थे वहा दीपक शर्मा, पुरोहित जी राजस्थान से, ढींगरा साहब दिल्ली से । कपिल गर्ग दादरी और भाई चरणजीत और Ashu Tosh Kaushik Beriwal जी सभी जोश में किसी को पेट की या भूख की चिंता किसको थी। समर्थको का उत्सहा चरम पर था। अधितर राज्यो से सोशल मीडिया के कांग्रेस समर्थक जुटने शुरू हो गए । विशाल कुंद्रा दिल्ली की आई टी सेल से दिखाई दे रहे थे, सब एक दुसरे का परिचय देते गले मिलते । लग रहा था एक अर्धकुंभ यहाँ हो रहा था । कांग्रेस की विचार धारो का, जिसके संगम में आज नहा कर शायद मैं और ज्यादा ऊर्जा से ओत प्रोत हो रहा था।



एक नौजवान जो कटिहार से आया था । आयुष मिश्र और राम ये दोनों हम सब में सबसे कम उम्र के थे । इशिता सेंधा उत्तराखण्ड से वहां मौजूद थी, तब दूसरी ओर उड़ीसा से शमशिदा तैयब वहां आ गयी थी। घड़ी की सुइयों ने कब चार बजा दिए, आपसी परिचय में समय का पता ही न चला । अचानक समर्थको को टी वी पर चमकने वाले कांग्रेस समर्थक शहज़ाद पूना वाला दिखाई देने लगे सब के लिए शायद ये एक गौरवशाली और रोमांचित करने वाला लम्हा था । सारे समर्थक उनसे मिलने के लिए उनकी तरफ खिंचे चले गए

राजा दिग्विजय सिंह  तय समय पर पहुच गए । हम सब समर्थक हक्के बक्के थे की समय से पांच मिनट पहले ही राजा साहब आ चुके थे । मीडिया के बड़े बड़े कैमरे अपना ज़ूम लगाये मंच की तरफ ऐसे लग रहे थे ,जैसे सीमा पर मिसाइल तान दी गयी हो । मंच पर बिना किसी औपचारिकता के वरिष्ठ नेताओं ने राजा दिग्विजय सिंह का स्वागत किया ।

मंच से डा.राज पुरोहित ने इस आयोजन को राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या बेला में परिवर्तित कर ,पहले राजीव गांधी जी की प्रतिमा पर फूल चढ़ा कर भावभीनी श्रधांजलि देने के लिए सब का आवाहन दो मिनट के मौन से प्रारम्भ किया ।


सम्मलेन में मंच पर विराजमान लोगो ने अपने संस्मरण गांधी परिवार के साथ बिताये पलो को याद किया । अब  शुरू हुवा सवाल जवाब का , खैर मेरे प्रश्न तैयार थे, लेकिन उत्तर भी मुझे वैसा ही मिला जैसा आशा किया था, काफी मित्रो ने सवाल जवाब किया पूरी प्रश्नावली इस विडियो में उपलब्ध है .. और भाई मनोज जी के इस लेख में भी , लेकिन मैंने देखा की समन्वय की कमी थी, जो लोग आज मुख्य रूप से काउंटर कर कहे है, उनकी कमी दिखी, अभी भी काग्रेस को एक माइक्रो मैनजमेंट की जरुरत है काग्रेस को सोचना पड़ेगा, कार्यकता उत्साहित है, लेकिन उन कार्यकर्ताओ को लीडर शिप की जरुरत है, जिसका डाटा काग्रेस को बनाना पड़ेगा, काग्रेस की विचारधारा तो सही है, लेकिन क्या वो सफल हो पा रही है, उसके लिए एक चिंतको की टीम बनानी पड़ेगी जो आप के आस पास ही मौजूद है, देश को आप्सन देना पड़ेगा भाई, अगर आप की विचारधारा सही है तो लोगो को कनवेंस करो भाई, काउंटर करो भाई, लेकिन इसकी कमी है काग्रेस में, काग्रेस को भी एक चिंतन डिविजन बनाना पड़ेगा जो सोसल मिडिया पर जवाब दे सके, और जो राजनितिक लाभ के लिए जुड़े है, वो राजनीती में अपना जना धार बनाये, हमने तो अपने बनारस के काग्रेस के संघटन के बारे में पूछा तो दिग्बिजय सिंह जी ने मेल में भेजने का वादा किया, मेल तो अभी तक आया नहीं, साहब अपनी विचार धारा को जन जन तक पहुचाओ, और उसका आधार है आप के कार्य करता मुझे नहीं लगता की इसका डाटा बैंक है काग्रेस पार्टी के साथ तरह तरह की बाते आती है काग्रेस के लिए, अरे भाई आप एक सर्वे ही करा ले, अपने कार्य कर्ताओ के माध्यम से, कुछ तो रिजल्ट आएगा, जैसा जोश इस समेलन में दिखा भविष्य तो उज्जल ही दिखाई दे रहा है, बस थोडा रिसर्च कर ले, सफलता कदम चूमेगी, जैसे राजा दिग्विजय सिंग जी ने अपने भाषण में कही वैसे ही अपने कार्यकर्ताओ के माध्यम से जन जन तक पहुचना पड़ेगा, दिग्विजय जी को बीजेपी के मिडिया मैनेजमेंट के बारे में जानते है, माना वो बहुत महगी एजेंसी है, लेकिन अपने देश में भी माइंड टूल्स की कमी नहीं, प्रयास तो कर ही रहे होगे लेकिन किसी ज्ञानी पुरुष ने ये कहा है की “ असफला ये सिद्ध करती है की किया हुवा कार्य सही मन से नहीं किया गया , प्रमोद कृष्णन जी को मैंने सुना, पहली बार ही सुना था, गूगल में खोजा, कुछ खास जानकारी नहीं मिली, लेकिन प्रयास सभी कर रहे है, जो की सराहनीय है, बस एक माइक्रो मैनजमेंट की जरुरत है.... राजा साहेब आप मानते है की आप चुनाव इस लिए हार गए की आप भाजपा की कुप्रचार का जवाब नहीं दे पाए, तैयार कीजिये कार्यकर्ताओ को, बहुत ही ब्रेन टूल्स है, आप कार्यकर्ताओ को खुद खोजे, १ खोजेगे हजार मिलेगे, आप अपनी उपलब्धियों के ब्रेन टूल्स के माध्यम से जन मानस तक पहुचाये, जरुर सफलता मिलेगी

 Social media : सोशल मीडिया के दौर में अजेण्डा सेटिंग और परम्परागत मीडिया परिदृश्य

कार्यक्रम दो घंटे का होना था लेकिन पूरे पांच घंटे का ये सेशन उत्साह भरा था सभी के लिए । हर समर्थक से राजा साहब ने बात की, सवालों का ज़बाब दिया ।

अंत में कार्यक्रम की समाप्ति में चालू हुआ सेल्फियो का दौर जिसके साथ आयोजन संपन्न हो गया था ।
मीटिंग का दौर ५ घंटे लगातार वैसा ही जोश कार्यकताओ का, १० बज चुके थे सभी विदा लिए भूख भी भयंकर लगी थी बाहर निकल भाई दीपक शर्मा "अधिवक्ता " ने सभी लोगो को नास्ता कराया, चल पड़े अपने घोसले के ओर सभी लोग. अब आगे आप लोग बताये तो वहा आये थे... 

आप को हमेसा अपने सोसल मिडिया टीम को ट्रेनिंग देनी चाहिए क्यों की आप खुद देखे अभी देशभक्ति ही मूल है , आप के पास मिडिया का सहयोग है नहीं, उनके लेखक और ट्रोल भरे पड़े है
 
नए #राष्ट्रवादी 6 #नियम #भक्तो के लिये ( #दिमाग से #पैदल #बुद्धिहीन #भक्त इनका पालन करें और #देशभक्ति का प्रमाण-पत्र प्राप्त करें ) 

#नियम_01 गैर बीजेपी शासित प्रदेशों यथा दिल्ली, केरल, पंजाब,बंगाल आदि में अगर #चूहा भी मर जाये तो तत्काल मुख्यमंत्री का इस्तीफा माँगें और बीजेपी शासित राज्यों में #आग भी लग जाये तो उसे #विपक्ष की साजिश कहें।। 

#नियम_02 कोई कांग्रेसी,आपिया,वामपंथी अगर जुबान से #पाकिस्तान का नाम भी ले ले तो उसके खिलाफ जितनी #गालियाँ #माँ-बाप ने सिखाई हों, सब दे डालें किन्तु प्रधानमंत्री जी के #पाकिस्तान प्रेम और #नवाज शरीफ से #मित्रता को उनकी #कूटनीति बताकर प्रशंसा करें।। 


#नियम_03 शाहरुख खान या जावेद अख्तर जैसा कोई #मुसलमान कलाकार या कोई विपक्ष का समर्थक कलाकार अगर #पाकिस्तान में शो करे या उनके कलाकारों को काम दे तो उसकी #चमड़ी #उधेड़ने की पोस्ट तत्काल करें लेकिन अगर #परेश #रावल जैसा कोई #देशभक्त सांसद पाकिस्तान में काम करना चाहे तो उसे ये कहकर #सम्मान दें कि #कला #सरहदों को नहीं मानती।। 

#नियम_04 सिर्फ #Zन्यूज़ और #इंडिया #टीवी की खबरों को ही प्रमाणिक समझें।। #NDTV भूल से भी न देखें अन्यथा #अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।। 

#नियम_05 #सरकार के #खिलाफ आवाज उठाने वाले हर आदमी को बिना समय गँवाएँ #देशद्रोही की संज्ञा से संबोधित करें।। आपको अपना बचा खुचा दिमाग इस चीज पर बिल्कुल नहीं लगाना है कि #विरोध करने वाला #सैनिक है या #किसान! #समाजसेवी है या #व्यापारी !! आप भले ही खुद एक #गुंडे, #मवाली, #उठाईगीर किस्म के व्यक्ति हो जिसने अपना पूरा जीवन #बेईमानियों से ही चलाया है किंतु आपको बेझिझक हर #सत्ता #विरोधी को #देशद्रोही बोलना ही बोलना है।। 


#नियम_06 #गाय और #हिंदुत्व पर एक पोस्ट रोज करें।। उसकी #रक्षा आपको सिर्फ #सोशल मीडिया में करनी है।। बांकी बाहर क्या हो रहा, कितनी गायें #सड़क पर हैं,कितनी गंदगी खाने को मजबूर हैं,,इसका आंकलन करना आपके #बुद्धि के #बाहर है सो उसपर दिमाग न लगायें,, किन्तु पोस्ट जरूर करें।। ((नियमों का पालन न करने वालों को भी #देशद्रोही माना जायेगा)) 

#आदेशानुसार - #देशभक्ति के आविष्कारक सर #मोदिस्टाइन.. #राजीवशंकरमिश्र #banaraswale 


आप अपने कार्यकर्ताओ को सामाजिक रूप से भी जागरुक करे … सिर्फ़ फ़ेसबुक या सोसल मिडिया से काम नहीं बनेगा ..

लिस्ट चेक करें और जानें… मैं नीचे एक लिस्ट दे रहा हूं उसे चेक करके सच-सच बतायें कि इसके अनुसार आप कितने “सामाजिक” हैं? 

1)आप अपने बिल्डिंग/गली/मोहल्ले/सोसायटी में रहने वाले कितने व्यक्तियों को चेहरे से, कितनों को नाम से जानते हैं? उनमें से कितनों के बारे में यह जानते हैं कि वह क्या काम करता है? 

2) जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, उनके घर वर्ष में कितनी बार गये हैं? 

3)आपकी कालोनी में हुई कितनी शादियों / अर्थियों में आप कितनी बार गये हैं? कितनी बार आप होली-दीवाली के अलावा भी पड़ोसियों से बात करते, मिलते हैं? 

4)आप अपनी कालोनी/सोसायटी की किसी मीटिंग अथवा समिति में कितनी बार गये है? क्या आप किसी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था से जुड़े हुए हैं? और उसकी गतिविधियों में माह में कितनी बार जाते हैं? 

5) क्या आप अपने इलाके के पार्षद (Corporator), विधायक, सांसद को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं? उनके फ़ोन नम्बर या पता आपको मालूम है? अपने इलाके के राजनैतिक कार्यकर्ताओं-मवालियों-गुण्डों को आप पहचानते हैं या नहीं? 

6) क्या आप जानते हैं कि आपके मोहल्ले-गली-वार्ड का बिजली कनेक्शन किस ट्रांसफ़ार्मर से है? आप अपने इलाके के बिजली विभाग के बारे में उनके फ़ोन नम्बर के अलावा और क्या जानते हैं? 

7) क्या आप जानते हैं कि आपके इलाके-मोहल्ले-गली-सड़क को पानी की सप्लाई कहाँ से होती है? क्या कभी आपने मोहल्ले की पानी की पाइप लाइन की संरचना पर ध्यान दिया है? 

8) क्या आप कॉलोनी की सीवर लाइन के बारे में जानकारी रखते हैं, कि वह कहाँ से गई है, कहाँ-किस नाले में जाकर मिलती है, कहाँ उसके चोक होने की सम्भावना है… आदि-आदि? 9) आपके मोहल्ले में अमूमन लगातार वर्षों तक घूमने वाले अखबार हॉकर, ब्रेड वाले, दूध वाले, टेलीफ़ोन कर्मी, बिजलीकर्मी, नलकर्मी, ऑटो रिक्शा वाले आदि में से आप कितनों को चेहरा देखकर पहचान सकते हैं? 

10) जिस सड़क-गली-मोहल्ले से आप रोज़ाना दफ़्तर-बाज़ार आदि के लिये गुजरते हैं क्या आप उस पर चल रही किसी “असामान्य गतिविधि” का नोटिस लेते हैं? क्या आपने कभी अवैध मन्दिर-दरगाह या अतिक्रमण करके बनाई गई गुमटियों-ठेलों-दुकानों-मकानों पर ध्यान दिया है? यह तमाम जानकारियाँ “सामाजिक जागरुकता” के तहत आती हैं, जिनकी जानकारी सामान्य तौर पर "थोड़ी या ज्यादा", प्रत्येक व्यक्ति को होनी ही चाहिये… क्योंकि “बुरा समय” कहकर नहीं आता, कहीं ऐसा न हो कि खतरा आपके चारों ओर मंडरा रहा हो और आप अपने घर में टीवी ही देखते रह जायें…। 

अंत में चलते चलते मेरी यही सलाह है की कम से कम उत्तर प्रदेश में जिला वार संगठन की डिटेल एक वेब साइड पर डाले और उनके लिए एक प्रभारी-सोशल मीडिया नियुक्त करे जो कांग्रेस पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों को सोशल मीडिया के माध्यम से जनपद से लेकर विधानसभा स्तर व लोकसभा स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से सभी जनपदों में सोशल मीडिया के जिला एवं शहर प्रभारियों को जिम्मेदारी दे । इन जिला एवं शहर प्रभारियों को संगठन से जोड़कर कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों को न सिर्फ ग्राम स्तर तक पहुचाये बल्कि समाज में विरोधी दलों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के विरूद्ध फैलाये जाने वाले दुष्प्रचारों को रोककर प्रभावी तरीके से जवाब भी दे । आप उनको गोल दे जो काग्रेस के विरुद्ध दुष्प्रचार कर रहे है वही उनको लोजिक्ली काउंटर करे... जो लोग काग्रेस के लिए समर्थन में लिझते है, देखे कैसे ट्रोल आते है, आप को इसकी जिम्मेदारी आप के it सेल को देनी पड़ेगी, जो काग्रेस के चिन्तक है, आप उनको fallo करे और अपनी मिडिया टीम को भी fallo करवाए... कैसे वहा बहस होती है, संघ के लेखक कैसे माइंड वाश करते है भक्तो का आप खुद देखे और इसके परिणाम की समीक्षा करते रहे, तब जनता में उत्साह आएगा

अगर आप अपने स्टेट्स को दुसरे की वाल पे देखते हैं हूबहू या कुछ और एडिटिंग के साथ और सोंचते हैं की फला ने आपके विचारो की कॉपी कर ली तो रुकिए जब आप गर्व की अनुभूति में डुबकी लगा रहे होते हैं तब आपकी मानसिकता उस नर्सरी के बच्चे की तरह होती है जो दुसरे के टिफिन में आलू टिंडे की की सब्जी देखकर सोंचता है की फला की अम्मा ने उसकी अम्मा की डिश कॉपी कर ली।

मित्रो जब उत्पीड़न सामूहिक रूप से समूहों द्वारा हुआ है तो प्रतिकार भी समूहों में सामूहिक रूप से ही करें । वो झूठ को हूबहू कॉपी करके वाट्स एप विश्विद्यालय के छात्रों में पर्चे की तरह बाँट देते हैं कसम देकर मेसेज आगे बढ़वा देते हैं और आप अगर स्टेटस कॉपी होने पर नाक सिकोड़ लेंगे तो आपकी विचारधारा सीमित हो जायेगी विचार अगर अच्छे हैं तो दुसरे से तीसरे और तीसरे से चौथे की वाल पे पहुंचना जरूरी है
श्रेयवाद से बचें!

नाम नही काम में यकीन होना चाहिएखुद देखे कितने तेज है आप के वालंटियर्स .. जय काग्रेस 
 





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