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Monday, March 2, 2015

मन की बात

बात उन दिनों की है जब मै शायद क्लास ७-८ में पड़ता था.. पापा बड़ी बुवा के यहाँ लखनऊ गए थे , घर में हम संजू टूसी और अम्मा... पापा के लखनऊ जाने के ४-५ दिन बाद माता जी ने पिता श्री का हाल खबर 
लेने की लिए मुझे २० रूपया दिया , इन दिनों संचार के साधन बहुत महगे थे , अपने चौराहे पर तो कोई फोन बूथ भी नहीं था , उन दिनों घर में लैंड लाइन फोन एक स्टेटस सिम्बल होता था , अपने घर में भी फोन नहीं था , तो मै २० रूपए ले कर नाटी इमली चौराहे पर काशी के दुकान पर गया , काशी को २० का नोट दे कर बुवा के घर का नंबर लगाने को कहा , फोन की घंटी गयी , उधर से किसी ने उठा , मैंने कहा , मै काटन मिल से राजू बोल रहा हु , मेरे पापा से बात करा दीजिये, पापा लाइन पर आये ..” पापा हम राजू बोलत हई..., कब घरे अइबा , अम्मा पूछत हइन ... उधर से पापा.... “ हा बोलो बेटा , कैसे हो तुम, घर में सब लोग कैसे है, मै
एक दो दिन में वापस आ जाऊगा.... मै , पापा की भाषा सुन कर घबडाहट से फोन रख दिया , फिर रीडायल किया , इस बार पापा ने ही खुद फोन उठाया .... पापा.. फोन क्यों काट दिए.... मै घबडा गया... मन रोना हो गया , मुझे लगा कोई और बोल रहा है , फिर निवेदन... अंकल जी मै काटन मिल से राजू बोल रहा हु , मेरे पापा से बात करा दीजिये.... उधर से ... मै पापा ही बोल रहा हु बेटा .... मै घबडा कर... पापा तू कईसे बोलत हया...... पापा... क्या हुवा.... मैंने फोन फिर काट दिया.. फिर रीडायल... पापा ... उधर से गुस्से में धीमी आवाज में... का भयल.... सुनत नाही हौव्ये.... अम्मा के कह दिहा... १-२ दिन में घरे आ जाब.... तब जा का तसल्ली हुई... घर आ के बता दिया...इस घटना को शायद २२-२४ साल हो गया ..... सोचता हु उस समय को....

कल वही चीज फिर अम्मा के साथ... मैंने फोन किया आम्मा को... माँ कल शाम १० बजे मुरादाबाद स्टेशन पर .... ट्रेन लेट ... अम्मा प्रणाम...कहा हउ... अम्मा... राजू.. मै स्टेशन पर हु... ट्रेन लेट है अभी १२ बजे आएगी... मै चकपका गया... फिर कान से फोन हटा कर देखा .. किसको फोन लग गया... स्क्रीन पर अम्मा का ही नंबर.... याद आ गया पापा वाली बात.... अपने घर से दूर अम्मा को अपनी भाषा में बात करने में दिक्कत हो रही है .... लेकिन मै तो अपनी ही भाषा में .... और माता श्री अपनी ही भाषा में.... फिर जब वो भोजपुरी शुरू की तो धीमी आवाज में .... लगा कोई नहीं है उनके आस पास... हसी आ गयी ...

भाषाए तो बहुत जनता हु... लकिन मुझे अपनी मात्री भाषा भोजपुरी.... मुझे सबसे आसान लगती है..... क्यों की वो मेरे अम्मा पापा की अपनी भाषा है... लेकिन बाहर जाने के बाद.... मुझे उनकी बात समजने में ज्यादा जोर लगाना पड़ता है....

पता नहीं क्यों...  लेकिन मै इतनी जगह घूमता हु... किसी की कोई भी भाषा ही मै उसकी ही भाषा में बात करता हु पर ३०% तो मै... अपनी ही मात्री भाषा.... जो मैंने माँ पापा से सिखा है 

काफी सालो से ये लड़ाई चल रही है ... मेरे माँ पापा भी भाषा... भोजपुरी... भारत के सविधान के आठवे अनुसूची में शामिल हो.... लड़ाई अब आखिरी चरण में है .... शायद अब हो भी जाये.... तब अम्मा कही भी जाये .. मुझसे तो मेरी ही भाषा में बात करेंगी.... 😄😄😄😄😜😱            

#मन की बात



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