post:


Wednesday, June 1, 2016

मदुरई यात्रा

दिनांक : (1 May 2016-Sunday) अब तयारी थी श्री सैलम से मदुरई के लिए, हमारी बस (Andhra Pradesh State Road Transport Corporation  ) की दिन के १२.३० पर खुली श्री सैलम बस स्टैंड से कर्नूल के लिए, ड्राईवर ने बताया की शाम ४.३० तक बस पहुचेगी गर्मी भी ठीक ठाक ही थी, बस की रफ़्तार भी औसत ही थी, लेकिन वहा के सडको की हालत उत्तर भारत से बेहतर ही दिखा, निर्धारित समय पर बस ने कुर्नुल पंहुचा ही दिया हैदराबाद के लिए मदुरई की बस थी जो कर्नूल हो कर गुजरती है इस लिए हमारी बोर्डिंग थी कर्नूल  से.. दक्षिण भारत में आराम दायक बस के लिए kpn ट्रेवल ठीक है उनकी Volvo A/C Multi Axle Semi Sleeper (2+2) सीटर बस की यात्रा आरामदायक है कर्नूल से मदुरई के लिए करीब 12:15 Hrs.  लगते है.. कुर्नूल, आंध्रप्रदेश  राज्य के बड़े शहरों मे एक है। यह तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा है। आंध्र प्रदेश के अवरतण के पूर्व कर्नूल नवंबर १, १९५६ तक आंध्र राष्ट्र का राजधानी था।

इस नगर को 11 वीं सदी में बसाया गया था। प्राचीन समय में यहाँ हीरे की खानें थीं। विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत रहने के पश्चात इस नगर का पतन होने पर गोपालराय का यहाँ कुछ दिन आधिपत्य रहा। बीजापूर के सुल्तान के काल में यहाँ अनेक मस्जिदें बनवाई गयीं। बीजापुर के सुल्तान के शासन काल में शिवाजी ने इस इलाके से चौथे वसूली की। औरंगज़ेब के समय कर्नूल पर मुग़लों का अधिकार हो गया था, लेकिन बाद में निज़ाम हैदराबाद ने कर्नूल को अपने राज्य में सम्मिलित कर लिया था। तो निर्धारित समय पर APSRTC की बस ने हमें कर्नूल बस स्टैंड पर उतार दिया जहा से हमें इस मोबाइल टिकट के पते पर जाना था .. –
redBus mTicket -

Kurnool to Madurai
<TIN> TJ5T53654258
<PNR> D269424902
<Travels> KPN
<Dep time> 05:45 PM May 1, 2016
<Seats> R4(M),R3(F)
<Total Fare Paid> Rs.3830
--
<Boarding pt> KURNOOL(KPN)
<Landmark> Near Highway Lodge,Haunuman Temple
<Address> D.No:76/82F NH-7.Dhone Road,Kurnool
<Contact> 9246189199
--
Thanks for using redBus. Please present this mTicket at the time of boarding.
redBus Helpline:
(040) 39412345
T&C apply


तो हम माता जी के साथ ऑटो पकड़ कर पहुच गए हाईवे लोज हनुमान मंदिर के पास ५ बज चूका था और बस थी ५.४५ की तब तक वही एक दुकान पर बैठा माता जी को हम लग गए धुम्रपान की तलाश में नास्ता पानी करते 1 घंटे में बस भी आ गयी, इसपर सवार हम निकल पड़े मदुरई के लिए ... बस ने रात १० बजे एक मस्त ढाबे पर खाने के लिए रोका वहा भोजन के पश्चात बस चल पड़ी रास्ते में बंगलौर का भी दर्शन हुवा, फिर मोबाइल पर मदुरै के बारे में पड़ते पड़ते कब नींद आ गयी, 
(2 May 2016-Monday) सुबह ६ बजे नींद खुली तो पता चला की मदुरै आ चूका है, ठीक ६ बजे बस वाले ने हमें हाईवे पर उतार दिया वहा से हमें एक छोटी बस हमें मदुरई शहर में ला कर छोड़ दी, जो करीब ४ किलो मीटर, मदुरै उतरते ही मजा आ गया सब लोग सिर्फ लुंगी में.... हम तो सिर्फ बनारस में ही लुंगी..  सामान ले कर नीचे उतरे होटल की खोज में तो एक ऑटो वाले से टकराया होटल के लिए , उसने कहा की वो होटल दिलवा देगा सामान रख सवार हो गए उसके ऑटो में, वो पास ही गलियों में जहा होटल ही होटल थे एक पतली सी गली के सामने रोक दिया (Mmtt Tours & Travels)
  • +(91)-452-4231177
  • +(91)-9842179559, 7871140666
  • No 12 Asoka Palce Hotel, Down Hal Road, Madurai Bazaar, Madurai - 625001, Perumal Tank East 
No 11, Near Ashoka Palace Hotel, Perumal Theppa Kulam
,Town Hall Road, Madurai, Tamil Nadu 625001, India ) और अन्दर ले गया वहा एक लुंगी सर बैठे थे.. पहले तो ऑटो वाले और लुंगी वाले ने कुछ तमिल में बात किया जो मेरे सर के उपर से गुजर गया, शायद वो लुंगी भाई ट्रेवल एजेंट थे... फिर उन्हों ने मेरा प्रोग्राम पूछा, कहा कहा जाना है.. मैंने कहा भाई होटल चाहिए... बाकी का मै  आगे खुद देख लूँगा... तभी वो ऑटो वाला बीच में बोला, सर आप इनको अपना पूरा schedule बता दे.. ये पूरा अरेंज कर देगे... फिर मैंने बता दिया की मै अपनी माता जी को तीर्थ यात्रा करवाने के लिए आया है.. मुझे मदुरै.. कोदई कनाल रामेश्वरम से कन्याकुमारी जाना है... उसके आगे का टिकट मेरे पास है... आप क्या मदत कर सकते है... लुंगी अंकल ने पूरा प्रोग्राम कागज में लिख हिसाब किताब बनाने लगे... फिर पूछा की रूम AC या धर्मशाला... मैंने कहा सर जी... रूम तो AC ही चाहिए.. ठीक ठाक लेकिन बजट का होना पड़ा.. फिर लुंगी अंकल ने मुझे ऑटो वाले के साथ भेजा ऑटो वाले को तमिल में कुछ समझा कर.. मै  भी ऑटो वाले के साथ बाहर निकल गया बाहर सड़क पर .. २ मकान के बाद एक होटल दिखा जिसमे ऑटो वाले ने रूम दिखाया रूम चौथे मंजिल पर था लेकिन ठाक ठाक.. मैं कमरा लेते समय दो बाते ध्यान से देखता हूँ पहली टायलेट साफ़ हो दूसरी बिस्तर की हालत ठीक हो जिससे हमें परेशानी ना हो।

मैंने हा कर दिया रेंट पूछा तो बोला की सब एजेंट ही फाइनल कर देगा आप चले.. फिर एजेंट के आफिस में ..फिर एजेंट ने हिसाब किताब कर के बताया ४ दिन का होटल और ट्रांसपोर्ट के साथ दो लोगो का ९००० रुपये... मन में सोचा की ये तो ठीक ही है लेकिन रहे बनारसी तो लगे मोलाने.. ज्यादा है बड़े भैया कुछ कम कीजिये... ना नुकुर के बाद ८५००/- में बात फिक्स हो गयी.. मैंने ७००० रुपये एडवांस दिए.. बोला १५०० कन्या कुमारी में दुगा... वो तैयार हो गए.. लुंगी सर बोले आप रूम में जाइये.. और टूर के प्लान कीरसीद थमा दिया .. अभी थोड़ी देर में मेरा आदमी आप के पास आएगा वो आप को पूरा प्रोग्राम दे देगा ..अब सामान ले होटल के रूम में... एंट्री कर सामान ले माता जी को रूम में पहुचाया... ८ बज चूका था सुबह का .. माँ से चाय के लिए पूछा तो माँ ने मना कर दिया तो मै बाहर के रस्ते के समझने के लिए नीचे उतर गया... होटल हमारा मीनाक्षी मंदिर के पास ही था.. बाहर का चक्कर लगाना शुरू किया.. पहुचे एक चाय की दुकान पर चाय वाले को हिंदी नहीं मुझे तमिल नहीं... लेकिन मूक भाशा से सारा माजरा समझ में आ गया ... इधर उधर चक्कर मार.. आधे घंटे में पहुचे पुनः होटल... माता श्री नहा चुकी थी ... इस होटल में टीवी को ब्यवस्था दिखी.. और यहाँ चुनाव का भी माहौल तो सोचा जरा दक्षिण भारत की खबर ले लू.. टीवी ओन किया.. सब चैनल में तमिल... यहाँ तक की कार्टून और निक चैनल भी तमिल में... मजा आ गया.. की होलीडे बच्चो के साथ मनाने की जगह दक्षिण भारत है.. जहा
कार्टून भी तमिल में.. तभी दरवाजे पर नाक हुवा मैंने दरवाजा खोला तो एक बुढा उसने हमारे ट्रिप की रसीद मागी फिर पूरा प्रोग्राम बताया जो आप इस विडियो में देख सकते है..
   
मदुरै हिन्दुओ की एक पबित्र धर्म-स्थली है.जो तमिलनाडू में स्थित है. कहा जाता है की-पुराने ज़माने में ,एक कदम्ब्वा नाम नाम का एक जंगल था. यहाँ भगवान  इन्द्र ने स्वयंभू की पूजा की थी. इसी लिंग को, जो कदम ब्रिक्ष के निचे था, धनजय नाम का एक किसान ने देखा था और उस दृश्य को ,राजा कुरुक्षेत्र पंडया को सूचित किया. राजा  ने उस जंगल को साफ़ सफाई  कराइ तथा एक सुन्दर मंदिर का निर्माण करवाया... धीरे-धीरे वहा  एक  शहर बस गया., मदुरई का नाम “मधुरा” शब्द से पड़ा जिसका अर्थ है मिठास। कहा जाता है कि यह मिठास दिव्य अमृत से उत्पन्न हुई थी तथा भगवान शिव ने इस अमृत की इस शहर पर वर्षा की थी।

इसे मधुरं कहा जाने लगा.धीरे-धीरे यही नाम...मदुरै में बदल गया.   शहर के उत्तर में सिरुमलाई पहाड़ियां स्थित हैं तथा दक्षिण में नागामलाई पहाड़ियां स्थित हैं। २००१ से २००२ तक दक्षिण भारत में नौकरी करता था तब तमिलियन लोग हिंदी नहीं बोलते थे  लेकिन शायद ये टूरिस्ट प्लेस होने की वजह से बिलकुल अलग सा एवं झूठा लगा. प्रायः हर शिक्षित तमिलियन उलटी-पुलती हिंदी बोल रहे थे और हमारे प्रश्नों का जबाब देनेका भरपूर कोशिश कर रहे थे.

हम नहा धो १० बजे तक नीचे उतरे..
तभी हमारा एक नया गाइड मिल गया.. मीनाक्षी सुदेश्वर  
मंदिर के दर्शन के लिए..लेकिन हमें तो लगी थी भूख, कहा भाई पहले तो नास्ता करेगे फिर आगे का प्रोग्राम.. तुरंत बोला, आप चलिए मै आप को नास्ता करवाता हु.. बस वो आगे और हम माता जी को ले पीछे .. रास्ते में उसने बताया की मदुरई शहर विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। विभिन्न धर्मों के अवशेष इसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान बनाते हैं। मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर, गोरिपलायम दरगाह और सेंट मेरीज़ कैथेड्रल यहाँ के प्रमुख प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है। गाँधी संग्रहालय, कूडल अल्ज़गर मंदिर, कज़ीमार मस्जिद, तिरुमलाई नयक्कर पैलेस, वंदीयुर मारियाम्मन तेप्पाकुलम, तिरुपरंकुन्द्रम, पज्हामुदिरचोलाई, अलगर कोविल, वैगई बाँध आदि के बारे में, तब तक एक अच्छा रेस्टुरेंट दिखा , मतलब दक्षिणी व्यंजन। यहाँ के लोग अधिकतर चावल तथा चावल से बने व्यंजन खाना पसंद करते हैं। मदुरई में चावल के साथ बैंगन, भिंडी और नॉन वेज का भी खाने में बहुत प्रयोग किया जाता है। मदुरई की इडली बेहद प्रसिद्ध है। चावल के साथ सांभर यहां के लोग बड़े चाव से खाते हैं। यहां रसम, दही, छाछ आदि काफी प्रयोग किया जाता है। कूटू, अवियल, पोरियल, अप्पलाम, वरुवाल  आदि मदुरई के कुछ प्रसिद्ध व्यंजन हैं। मदुरई में एक और चीज बहुत ही प्रसिद्ध है और वह है जिगरठंडा (Jigarthanda), जो एक ठंडा पेय होता है। यहाँ नास्ते इडली, डोसा, उत्तपम..की सोच ही रहे थे तभी मेनू बोर्ड पर पूरी सब्जी भी दिखा.. तो माँ के लिए इडली वाडा और अपने लिए एक डोसा, साथ में 1 प्लेट पूरी सब्जी.. उत्तर भारत और दक्षिण भारत के भोजन में काफी विषमता है.. हम लोगो के स्वाद और वहा के स्वाद में अंतर.. साउथ के चारों राज्यों में इडली वडा और कॉफ़ी ओमनीप्रेजेंट हैं। कहीं भी जाइये हर जगह आपके पहुँचने से पहले ही तैयार मिलेंगे। इनमे वडा तो और भी गजब है। लोग कभी भी और कहीं भी वडा खाते हुए मिल जायेंगे। चाय के साथ वडा भी चलता हुआ मिलेगा। अब नास्ता समाप्त कर चल पड़े मीनाक्षी अम्मन के दर्शन के लिए रास्ता मालूम न होने की वजह से गाइड के साथ चल पड़े..   शायद मंदिर पास में ही था तो हमें पैदल ही चलना पडा.. गाइड के आदेस अनुसार.. उसने बताया की तमिलनाडु के मदुराई में स्‍थित मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर स्थापत्य एवं वास्तुकला की दृष्टि से आधुनिक विश्व के आश्चर्यों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान सुन्दरेश्वर (शिव) की भार्या जिनकी आंखें मछली की आंखों जैसी सुंदर हैं, को समर्पित हैं।

एक पौराणिक आख्यान है कि पान्ड्य राजा मलयध्वज की तपस्या से प्रसन्न होकर मां पार्वती के अंश के रूप&में रानी कंचनशाला ने मीनाक्षी नामक कन्या को जन्म दिया। कन्या धीरे धीरे बड़ी होने लगी। भगवान शिव अपनी बारात लेकर आए और मीनाक्षी के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ। स्वयं भगवान विष्णु ने अपनी बहन मीनाक्षी का हस्तमिलाप करके कन्यादान किया। इस घटना का शिल्पांकन मंदिर में दिखाई देता है।

यह मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर माना जाता है। इसका निर्माण 7वीं सदी के प्रारंभ में हुआ था। सन् 1310 में मुस्लिम आक्रांत मलिक काफूर ने इस मंदिर को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था। उस समय वहां के पंडे-पुजारियों ने मूल प्रतिमाओं को सुरक्षित बचा लिया था तथा 50 वर्ष के उपरांत जब मुस्लिम शासन से मुदराई मुक्त हुआ, तब उन प्रतिमाओं को पुन: आदपूर्वक अपने स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया।


सन् 1559-1600 में मदुराई के नायक प्रधानमंत्री आर्यनाथ मुदालियार ने मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया। पश्चात महाराजा तिरुमलनायक तथा उनके उत्तराधिकारियों ने मंदिर को पुन: अपनी श्रेष्ठता वापस दिलाई।
यह मंदिर मीनाक्षी अम्मन मंदिर प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। इस विशाल भव्य मंदिर का स्थापत्य एवं वास्तु भी काफी रोचक है। जिस कारण माँ का यह मंदिर को सात अजूबों में नामांकित किया गया है। इस इमारत में 12 भव्य गोपुरम है, जिन पर महीन चित्रकारी की है।

वस्तुतः किसी भी गाइड का उदेश्य जानकारी देना कम शोपिंग का ज्ञान देना उनका परम धर्म होता है.. मंदिर से कुछ ही दुरी पहले उसने बताया की आप को एकच दिन आये है.. आज मीनाक्षी अम्मन का विवाहहै... अभी अन्दर जायेगे तो 100 रूपये का टिकट लगेगा 1 घंटे बाद अन्दर जायेगे तो मंदिर भी खाली रहेगा और आराम से दर्शन हो जायेगा... तो क्या किया जाये अब भाई साहेब.. मैंने पूछा.. उसने एक कुटिल मुस्कान के साथ जवाब दिया.. यहाँ की साड़ियो की प्रसिद्धि दुनिया में है.. कांजीवरम ...आज अम्मन के शादी का दिन है तो हर चीज पर ५०% की छुट ही आप एक बार देख ले ... देखने के कौन से पैसे लगते है... मैंने भी सोचा.. खाली ठग हमारे बनारस में ही नहीं  हर जहग.. आमतौर पर यदि पूछा जाए कि दक्षिण की महिलाओं की पहचान क्या है तो उत्तर होगा लंबे, घने और काले बालों, उस पर सजी खूबसूरत वेणी और तीखे-नाक-नक्श... और... और... जी हाँ... कांजीवरम की खूबसूरत तथा भारी-भरकम साड़ियाँ।...  चले थे जब घर से तो पत्नी जी का आदेश था कांजीवरम की साड़ी लाने के लिए... तो गाइड के बताये एक दुकान में घुस गए अम्मा को ले... और मजाक मजाक में हो गयी २० हजार की खरीददारी .. एक घंटे हो चुके थे अब मंदिर में दर्शन .. तो दुकान दार ने भी कुछ मंदिर के बारे में ज्ञान दिया की मंदिर में कैमरे भी वर्जित हैं। मोबाइल का इस्तेमाल शुल्क देकर किया जा सकता है। दक्षिण के अन्य मंदिरों की तरह यहां भी ड्रेस कोड है। पर पुरुषों के लिए बंदिश नहीं महिलाएं शार्ट्स या स्कर्ट आदि पहन कर मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं। यहां की महिलाएं साड़ियां पहनाना पसंद करती हैं। इन साड़ियों में से खास हैं धावनी (Dhavani) या थावानी (Thavani) जो एक तरह की आधी साड़ी होती है। इसके अलावा यहां की महिलाएं सलवार कमीज भी पहनती हैं। यहाँ के स्थानीय पुरुष पहले लुंगी और शर्ट ... मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश करने वाले श्रद्धालु ये याद रखें कि उन्होंने कौन से द्वार से प्रवेश किया था। फिर वापस भी उसी द्वार से निकलें। वर्ना गलत द्वार से बाहर होने पर आप शहर के किसी और इलाके में पहुंच सकते हैं। 

कई एकड़ में बने मीनाक्षी मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं। हर प्रवेश द्वार पर विशाल गोपुरम है। इन गोपुरम मेंदेवी देवताओं के प्रतिमाएं हैं। जिसमे दक्षिण का गोपुरम सबसे ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई 160 फुट है। पूर्वी दिशा से प्रवेश करने पर सामने एक छोटा सा बाजार है। वहा पूजा पाठ की सामग्री मिलती है। यहीं दाई ओर सहस्त्र स्तंभ मंडप है, हालांकि इसमें 905 स्तंभ हैं। इसकी भी कलात्मकता दर्शनीय है। सभी स्तंभों पर मनमोहक मूर्तियां उत्कीर्ण हैं। मंडप के ठीक सामने नटराज प्रतिमा स्थापित है। अन्दर एक संग्रहालय है जो दिन भर खुला रहता है। यह संग्रहालय तमिलनाडु की प्राचीन कला का समृद्ध भंडार है। यहां कुछ संगीतमय स्तंभ भी है। पूर्वी दिशा में स्थित एक अन्य द्वार से प्रवेश करने पर अष्टशक्ति मंडप है। यहां पर देवी के अष्टरूप उत्कीर्ण हैं। यहां मीनाक्षी विवाह के कुछ दृश्य अंकित हैं। समीप ही मीनाक्षी मंडप है जिसमें एक सौ दस स्तंभ है। यहां पीतल के 1008 दीपों की श्रृंखला देखने योग्य है। बताया गया कि देवी मीनाक्षी की मूर्ति के सामने बुध ग्रह है। मूर्ति के दर्शन करने के बाद पीछे मुड़कर उस दिशा में देखते हुए प्रणाम>किया जाता है। बुध ज्ञान का प्रतीक है। हरा पत्थर बुध का प्रतीक माना जाता है। इसलिए देवी की मूर्ति मरगत पत्थर से बनाई गई है। माना जाता है कि बुध के देव विष्णु और देवी गौरी है। देवी मीनाक्षी की उपासना करनें वालो को अच्छी विद्या है। कहते हैं जो भी श्रधालु यंहा मन्नत मागनें आते है मीनाक्षी देवी उनकी सारी मन्नत पुरी करती है। और यह भी कहा जाता है बुधवार के दिन यंहा दर्शन करने सारी दुविधा इंसान की खत्म हो जाती है इसांन के सारे संकट खत्म हो जाते हैँ। अब आप अपना कैमरा जूता और सारे सामान यही छोड़ दे.. और दर्शन कर के वापस यही आये... दुकान का टोकन ले हम माता जी के साथ मंदिर के बाहर से ही पूजा सामग्री और माला फुल ले कर पश्चिम गेट से घुसे..
मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर वास्तव में हिन्दू धर्म ही नहीं अपितु भारतीय संस्कृति का एक गौरव है। अंदर जाने पर जो अनुभूति होती है, उसकी तो बात ही अलग है; इसका बाहर का रूप ही अत्यन्त चित्ताकर्षक है और अपनी विशालता की गाथा स्वयं ही बयान कर देता है। वहीं से यह उत्कंठा जागृत हो जाती है कि कितनी जल्दी अंदर प्रवेश कर लें। यह मंदिर जितना भव्य बाहर से है , कहीं उससे ज्यादा अंदर से है। अंदर घुसते ही मंदिर  का एक कर्मचारी एक बोर्ड के तरफ इशारा  करके  बताया की स्पेशल दरसन के लिए सौ रुपये लगते है. हमने स्वीकार कर लिया. क्यों की अब मंदिर बंद होने वाला था फिर क्या २ टिकट और मोबाइल के लिए ५० रुपये का टिकट..
मंदिर में दर्शन लिए श्रद्धालुओं की सालों भर भीड़ होती है। मीनाक्षी मंदिर में सुबह और शाम दर्शन किए जा सकते हैं। दोपहर में मंदिर बंद होने के बाद शाम को पांच बजे खुलता है।
दक्षिणी गोपुरम से प्रवेश करें तो दायी ओर एक सरोवर है। इसे स्वर्णकाल सरोवर कहते हैं। सरोवर के मध्यमें एक स्वर्णकमल बना है। कहते हैं कि इंद्र ने स्वयंभू लिंग पूजन के लिये जिस सरोवर से कमल लिये थे वह इसी स्थान पर था। सरोवर के सामने किलिक्कूडू मंडप है। यहां से दर्शनार्थी मीनाक्षी देवी के मंदिर में प्रवेश करते हैं। गर्भ गृह में देवी की अत्यंत मनोहारी श्यामवर्णी प्रतिमा विराजमान है। गर्भगृह के बाहर भी अनेक महत्वपूर्ण मूर्तियां बनी हैं। मीनाक्षी मंदिर के उत्तर दिशा में सुंदरेश्वर मंदिर है। उस ओर आगे बढने पर पहले विनायक प्रतिमा के दर्शन होते हैं। यह प्रतिमा आठ फुट ऊंची है। सुंदरेश्वर मंदिर में कम्बत्तडि मंडप में विष्णु भगवान के दशावतार रूपों का और मीनाक्षी विवाह का मोहक अंकन है। मंदिर के सामने नवग्रह प्रतिमा भी अवस्थित है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव सुंदरेश्वर रूप में विराजमान हैं। गर्भगृह के बाहर दुर्गा, लक्ष्मी, सिद्धि, सरस्वती, काशी विश्वनाथ और नयनार मूर्तियां भी हैं। दोनों ही मंदिरों में गर्भगृह के सामने स्वर्णध्वज भी स्वर्णमंडित है। उत्तर दिशा के प्रवेश द्वार पर बने गोपुरम में मूर्तियों की संख्या कम है, फिर भी उसकी भव्यता में जरा भी कमी नहीं। इस गोपुरम के निकट पांच संगीतमय स्तम्भ हैं जिनमें ग्रेनाइट के एक ही शिलाखण्ड से बाइस पतले स्तम्भ इस तरह तराश कर बनाये गये हैं कि प्रत्येक से अलग ही ध्वनि सुनाई पडती है।हाथ में 100 रुपये का टिकट था जिसकी लाइन अलग ही थी तो हम भी लग गए

.. बिच में पाइप की एक बैरकेटिंग जिसमे निशुल्क दर्शन के भक्त थी... जिसकी लाइन मंदिर के बाहर तक थी... मंदिर में अन्दर बड़े पंखो की मदत से शीतल हवा का आनंद था हम पहुच गए माँ मीनाक्षी के पास... दर्शन किये... वहा भी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण अपने भक्तो के तलाश में घूम रहे थे.... बड़ी पूजा करवाने के चक्कर में लेकिन हम माला फुल दे लाल रंग का चन्दन ले बाहर निकल एक परिक्रमा कर थोड़ी ही दूर भगवान गणेश जी की एक विशाल प्रतिमा स्थापित जिसे एक ही पत्थर को काट कर बनाया गया है।आखिर गणेशजी विघ्नहत्र्ता ही नहीं देवी पार्वती के पुत्र भी तो हैं जिन्हें यहां मुकुरनी विनायक के नाम से पूजा जाता है। यहाँ दो मन्दिर हैं एक शिव जी का है दूसरा उनकी प्रिया मीनाक्षी देवी अर्थात पार्वती का है। सुन्दरेश्वर मन्दिर के सामने जो विशाल कक्ष है उसके खम्भों पर भगवान शिव के विभिन्न मुद्राओं में चित्र बने हैं। उनमें उनके विवाह का अद्भुत मूर्ति चित्रण मुख्य है। यहाँ एक हजारों खम्भों का विशाल हॉल है जो कि १६ वीं शती में बना था। इन खम्भों पर एक ड्रेगन, शेर की मिली जुली आकृति वाले किसी पौराणिक जीव की आकृति बनी है। इन खंभों में प्रत्येक में से अलग ध्वनि प्रतिध्वनित होती है।



दर्शन पूजन संपन्न हुवा और हमारी निकासी हुई पूर्वी द्वार पर लेकिन हमें तो निकलना था पश्चिम द्वार से.. फिर मंदिर के अन्दर घूम घूम कर फोटो ले पहुच ही गए पश्चिम गेट पर...  नास्ता हैवी हुवा था .. हा गर्मी से प्यास तो एक ठंडा मिनरल वाटर पि पहुच गए उस दुकान पर जहा हमने अपना सामान रखा था ..वही गाइड साहब भी मिल गए ... सामान ले गाइड साहेब ने हमें एक ऑटो में बैठा दिया और उसको होटल का पता बता दिया... पहुच गए हम होटल सामान रखा ३ बजे से हमारी मदुरै की लोकल साइड सीन थी... 





Share This :

1 comment:

  1. Nice pictures.Thanks for this useful post.i fully agree. nice insights. Truly Awesome post ! It is really very interesting and informative. Thanks for posting this.online book Ticket through Redbus

    ReplyDelete